Friday, April 24, 2026

National

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खरगोन के शासकीय विधि महाविद्यालय में BNSS पर विशेष व्याख्यान 

ब्यूरो चीफ: आशाराम कुंडले, खरगोन (मध्य प्रदेश)

शासकीय विधि महाविद्यालय खरगोन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा नए कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने के उद्देश्य से विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शासकीय विधि महाविद्यालय आगर मालवा के सहायक प्राध्यापक श्री चांदमल भालोट उपस्थित रहे।

मुख्य वक्ता श्री भालोट ने अपने संबोधन में आपराधिक न्याय प्रणाली में हुए महत्वपूर्ण परिवर्तनों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नई संहिता में दंड की अपेक्षा न्याय को अधिक महत्व दिया गया है। साथ ही समन, वारंट तथा साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया में तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को कानूनी मान्यता प्रदान की गई है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी।

उन्होंने जीरो एफआईआर, गिरफ्तारी से संबंधित नियमों तथा पीड़ितों के अधिकारों से जुड़े नए प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि नई संहिता में जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है, जिससे लंबित मामलों की संख्या कम करने में सहायता मिलेगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दिग्विजय सिंह मंडलोई ने कहा कि कानून के विद्यार्थियों और भावी अधिवक्ताओं के लिए नए आपराधिक कानूनों की जानकारी अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार के व्याख्यान विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने में सहायक सिद्ध होते हैं।

व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता द्वारा संतोषजनक समाधान किया गया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, स्थानीय अधिवक्ता एवं विधि विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन महाविद्यालय की आयोजन समिति द्वारा किया गया।

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खरगोन के शासकीय विधि महाविद्यालय में BNSS पर विशेष व्याख्यान 

ब्यूरो चीफ: आशाराम कुंडले, खरगोन (मध्य प्रदेश)

शासकीय विधि महाविद्यालय खरगोन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा नए कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने के उद्देश्य से विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शासकीय विधि महाविद्यालय आगर मालवा के सहायक प्राध्यापक श्री चांदमल भालोट उपस्थित रहे।

मुख्य वक्ता श्री भालोट ने अपने संबोधन में आपराधिक न्याय प्रणाली में हुए महत्वपूर्ण परिवर्तनों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नई संहिता में दंड की अपेक्षा न्याय को अधिक महत्व दिया गया है। साथ ही समन, वारंट तथा साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया में तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को कानूनी मान्यता प्रदान की गई है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी।

उन्होंने जीरो एफआईआर, गिरफ्तारी से संबंधित नियमों तथा पीड़ितों के अधिकारों से जुड़े नए प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि नई संहिता में जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है, जिससे लंबित मामलों की संख्या कम करने में सहायता मिलेगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दिग्विजय सिंह मंडलोई ने कहा कि कानून के विद्यार्थियों और भावी अधिवक्ताओं के लिए नए आपराधिक कानूनों की जानकारी अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार के व्याख्यान विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने में सहायक सिद्ध होते हैं।

व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता द्वारा संतोषजनक समाधान किया गया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, स्थानीय अधिवक्ता एवं विधि विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन महाविद्यालय की आयोजन समिति द्वारा किया गया।

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