Tuesday, May 5, 2026

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अब स्कूटी नहीं, सीधे खाते में पैसा! छात्राओं को मिलेगा DBT का बड़ा तोहफा 

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक, शाहपुरा

शाहपुरा, 5 मई।
राज्य के महाविद्यालयों में अध्ययनरत मेधावी छात्राओं के लिए संचालित कालीबाई भील एवं देवनारायण छात्रा स्कूटी योजनाओं में अब बड़ा बदलाव किया गया है। स्कूटी वितरण का कार्य अब प्रत्यक्ष लाभान्तरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा, जिसके तहत स्कूटी की स्वीकृत राशि सीधे छात्राओं के बैंक खातों में जमा होगी।

महाविद्यालयों को मिलेगी राहत
अब तक स्कूटी वितरण की पूरी प्रक्रिया महाविद्यालयों को ही संभालनी पड़ती थी, जिससे प्रशासनिक और भंडारण संबंधी कई समस्याएं सामने आती थीं। स्कूटियों की आपूर्ति में देरी, उनके सुरक्षित रख-रखाव, रजिस्ट्रेशन और वितरण जैसी जिम्मेदारियों के कारण शिक्षण कार्य भी प्रभावित होता था।

एबीआरएसएम के प्रयास रहे सफल
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (उच्च शिक्षा) लंबे समय से इस व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहा था। संगठन के प्रदेश महामंत्री प्रो. रिछपाल सिंह ने बताया कि डीबीटी प्रणाली लागू होने से महाविद्यालयों पर अतिरिक्त भार कम होगा और शैक्षणिक वातावरण में सुधार आएगा।

उन्होंने कहा कि पहले स्कूटियों को कक्षा-कक्षों में रखना पड़ता था, जिससे सुरक्षा और स्थान की समस्या भी उत्पन्न होती थी। अब राशि सीधे छात्राओं को मिलने से ये सभी परेशानियां समाप्त हो जाएंगी।

पात्रता जांच तक सीमित रहेगा कार्य
संगठन के प्रदेशाध्यक्ष प्रो. मनोज बहरवाल ने बताया कि नई व्यवस्था में महाविद्यालयों की भूमिका केवल पात्रता जांच और वरीयता सूची तैयार करने तक सीमित रहेगी, जिससे शिक्षण कार्य बाधित नहीं होगा।

सरकार का आभार व्यक्त
इस निर्णय के लिए संगठन ने मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए इसे शिक्षा और छात्राओं के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

International

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अब स्कूटी नहीं, सीधे खाते में पैसा! छात्राओं को मिलेगा DBT का बड़ा तोहफा 

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक, शाहपुरा

शाहपुरा, 5 मई।
राज्य के महाविद्यालयों में अध्ययनरत मेधावी छात्राओं के लिए संचालित कालीबाई भील एवं देवनारायण छात्रा स्कूटी योजनाओं में अब बड़ा बदलाव किया गया है। स्कूटी वितरण का कार्य अब प्रत्यक्ष लाभान्तरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा, जिसके तहत स्कूटी की स्वीकृत राशि सीधे छात्राओं के बैंक खातों में जमा होगी।

महाविद्यालयों को मिलेगी राहत
अब तक स्कूटी वितरण की पूरी प्रक्रिया महाविद्यालयों को ही संभालनी पड़ती थी, जिससे प्रशासनिक और भंडारण संबंधी कई समस्याएं सामने आती थीं। स्कूटियों की आपूर्ति में देरी, उनके सुरक्षित रख-रखाव, रजिस्ट्रेशन और वितरण जैसी जिम्मेदारियों के कारण शिक्षण कार्य भी प्रभावित होता था।

एबीआरएसएम के प्रयास रहे सफल
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (उच्च शिक्षा) लंबे समय से इस व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहा था। संगठन के प्रदेश महामंत्री प्रो. रिछपाल सिंह ने बताया कि डीबीटी प्रणाली लागू होने से महाविद्यालयों पर अतिरिक्त भार कम होगा और शैक्षणिक वातावरण में सुधार आएगा।

उन्होंने कहा कि पहले स्कूटियों को कक्षा-कक्षों में रखना पड़ता था, जिससे सुरक्षा और स्थान की समस्या भी उत्पन्न होती थी। अब राशि सीधे छात्राओं को मिलने से ये सभी परेशानियां समाप्त हो जाएंगी।

पात्रता जांच तक सीमित रहेगा कार्य
संगठन के प्रदेशाध्यक्ष प्रो. मनोज बहरवाल ने बताया कि नई व्यवस्था में महाविद्यालयों की भूमिका केवल पात्रता जांच और वरीयता सूची तैयार करने तक सीमित रहेगी, जिससे शिक्षण कार्य बाधित नहीं होगा।

सरकार का आभार व्यक्त
इस निर्णय के लिए संगठन ने मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए इसे शिक्षा और छात्राओं के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

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