Wednesday, April 15, 2026

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आबूरोड में ‘ओरण बचाओ पदयात्रा’ का भव्य स्वागत, पर्यावरण और गौ संरक्षण का संदेश

ब्यूरो चीफ: इमरान खान

आबूरोड। जैसलमेर से प्रारंभ हुई ओरन बचाओ पदयात्रा का आज आबूरोड शहर में मानपुर स्थित ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर पहुंचने पर राजपूत समाज द्वारा भव्य स्वागत किया गया। गाय संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के इस महाअभियान के तहत टीम ओरन द्वारा निकाली जा रही संपर्क यात्रा को लेकर समाज में विशेष उत्साह देखने को मिला।

यात्रा के शहर में प्रवेश करते ही बड़ी संख्या में राजपूत समाज के लोग एकत्रित हुए और पारंपरिक तरीके से यात्रा का स्वागत किया। उपस्थित लोगों ने फूल-मालाओं से पदयात्रियों का अभिनंदन किया तथा अभियान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इस दौरान वातावरण में उत्साह और जागरूकता का विशेष माहौल बना रहा।

कार्यक्रम के दौरान समाज के वक्ताओं ने ओरन (देव वन) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये वन क्षेत्र न केवल धार्मिक आस्था से जुड़े हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि ओरन क्षेत्रों का संरक्षण करने से जैव विविधता सुरक्षित रहती है और पशु-पक्षियों को प्राकृतिक आवास मिलता है।

वक्ताओं ने गाय संरक्षण के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता का विशेष स्थान है। वर्तमान समय में गौ संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे इस अभियान से जुड़कर प्रकृति और जीवों की रक्षा में अपना योगदान दें।

इस अवसर पर राजपूत समाज के अनेक गणमान्य नागरिक, युवा एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस जनजागरण यात्रा की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए अत्यंत आवश्यक पहल बताया।

यात्रा के संयोजकों ने जानकारी दी कि यह पदयात्रा विभिन्न शहरों और गांवों में पहुंचकर लोगों को ओरन संरक्षण, जल संरक्षण और गौ सेवा के प्रति जागरूक कर रही है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में यह यात्रा और भी क्षेत्रों में जाएगी, जिससे अधिक से अधिक लोगों तक इस संदेश को पहुंचाया जा सके।

कार्यक्रम के समापन के पश्चात पदयात्रा आबूरोड से रवाना होकर रेवदर की ओर प्रस्थान कर गई, जहां भी स्थानीय लोगों द्वारा स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं।

यह पदयात्रा न केवल पर्यावरण और गौ संरक्षण का संदेश दे रही है, बल्कि समाज में जागरूकता और सहभागिता की भावना को भी सशक्त बना रही है।

International

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आबूरोड में ‘ओरण बचाओ पदयात्रा’ का भव्य स्वागत, पर्यावरण और गौ संरक्षण का संदेश

ब्यूरो चीफ: इमरान खान

आबूरोड। जैसलमेर से प्रारंभ हुई ओरन बचाओ पदयात्रा का आज आबूरोड शहर में मानपुर स्थित ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर पहुंचने पर राजपूत समाज द्वारा भव्य स्वागत किया गया। गाय संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के इस महाअभियान के तहत टीम ओरन द्वारा निकाली जा रही संपर्क यात्रा को लेकर समाज में विशेष उत्साह देखने को मिला।

यात्रा के शहर में प्रवेश करते ही बड़ी संख्या में राजपूत समाज के लोग एकत्रित हुए और पारंपरिक तरीके से यात्रा का स्वागत किया। उपस्थित लोगों ने फूल-मालाओं से पदयात्रियों का अभिनंदन किया तथा अभियान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इस दौरान वातावरण में उत्साह और जागरूकता का विशेष माहौल बना रहा।

कार्यक्रम के दौरान समाज के वक्ताओं ने ओरन (देव वन) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये वन क्षेत्र न केवल धार्मिक आस्था से जुड़े हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि ओरन क्षेत्रों का संरक्षण करने से जैव विविधता सुरक्षित रहती है और पशु-पक्षियों को प्राकृतिक आवास मिलता है।

वक्ताओं ने गाय संरक्षण के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता का विशेष स्थान है। वर्तमान समय में गौ संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे इस अभियान से जुड़कर प्रकृति और जीवों की रक्षा में अपना योगदान दें।

इस अवसर पर राजपूत समाज के अनेक गणमान्य नागरिक, युवा एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस जनजागरण यात्रा की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए अत्यंत आवश्यक पहल बताया।

यात्रा के संयोजकों ने जानकारी दी कि यह पदयात्रा विभिन्न शहरों और गांवों में पहुंचकर लोगों को ओरन संरक्षण, जल संरक्षण और गौ सेवा के प्रति जागरूक कर रही है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में यह यात्रा और भी क्षेत्रों में जाएगी, जिससे अधिक से अधिक लोगों तक इस संदेश को पहुंचाया जा सके।

कार्यक्रम के समापन के पश्चात पदयात्रा आबूरोड से रवाना होकर रेवदर की ओर प्रस्थान कर गई, जहां भी स्थानीय लोगों द्वारा स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं।

यह पदयात्रा न केवल पर्यावरण और गौ संरक्षण का संदेश दे रही है, बल्कि समाज में जागरूकता और सहभागिता की भावना को भी सशक्त बना रही है।

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