ब्यूरो चीफ: विजय द्विवेदी, बदनावर
जैन धर्म की पावन साध्वी परंपरा में तप, त्याग और आध्यात्मिक साधना की उज्ज्वल धारा को आगे बढ़ाने वाली पूज्य आर्यिका मां 105 विज्ञानमति माताजी ससंघ (7 पिच्छी) का ऐतिहासिक एवं धर्मधरा नगरी वर्द्धमानपुर (बदनावर) में शनिवार, 7 मार्च को भव्य मंगल प्रवेश होगा। इस अवसर को लेकर समस्त जैन समाज में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है।
महाकवि, दादागुरु आचार्य प्रवर श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज की गौरवशाली परंपरा में, जिनके प्रथम शिष्य संत शिरोमणि समाधिस्थ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज तथा उनके द्वितीय शिष्य अद्भुत चर्या के धनी समाधिस्थ आचार्य कल्प श्री 108 विवेकसागर जी महाराज रहे हैं, उन्हीं की सुशिष्या पूज्य आर्यिका श्री विज्ञानमति माताजी का यह मंगल आगमन धर्मप्रेमी जनों के लिए अत्यंत पुण्यदायी अवसर माना जा रहा है।
वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओमपवन पाटोदी एवं राजेश मोदी ने जानकारी देते हुए बताया कि आर्यिका श्री संघ का शुक्रवार सायंकाल तक बदनावर से समीप ग्राम मुलथान फाटा में रात्रि विश्राम संभावित है। इसके पश्चात शनिवार प्रातः लगभग 8 बजे आर्यिका श्री संघ का बदनावर वर्द्धमानपुर में भव्य मंगल प्रवेश होगा।
मंगल प्रवेश के पश्चात श्री कुंदकुंद सभागृह में पूज्य आर्यिका माताजी के मंगलमय प्रवचन आयोजित होंगे। इन प्रवचनों में धर्मप्रभावना, आत्मशुद्धि, संयम, अहिंसा एवं सदाचार के अमूल्य संदेश प्राप्त होंगे।
इस अवसर पर इंदौर के कालानी नगर जैन समाज सहित अनेक स्थानों से श्रद्धालुजन प्रातः बदनावर वर्द्धमानपुर पहुंचकर आर्यिका श्री संघ के दर्शन एवं वंदन का लाभ प्राप्त करेंगे तथा भावपूर्वक श्रीफल भेंट कर इंदौर आगमन का विनम्र निवेदन भी करेंगे।
जैन समाज के पदाधिकारियों एवं धर्मप्रेमी नागरिकों ने समस्त श्रद्धालुओं से इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर आर्यिका श्री के दर्शन, वंदन एवं मंगल प्रवचनों का लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।
यह मंगल अवसर निश्चित रूप से धर्मप्रभावना, आध्यात्मिक जागृति तथा समाज में सदाचार की भावना को सुदृढ़ करने वाला सिद्ध होगा।




