Thursday, April 16, 2026

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“पीड़ा ही बनाती है माँ, वंश को तारता है भागीरथ”—पं कमलकिशोर नागर

ब्यूरो रिपोर्ट: विजय द्विवेदी, धार (मध्य प्रदेश)

बदनावर। ग्राम पिंजराया में गोहिल परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। कथा के दौरान मालव माटी एवं मालवी वाणी के विख्यात कथावाचक पं. कमलकिशोर नागर ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरक उद्बोधन से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

पं. नागर ने कहा कि सत्संग और कथा मनुष्य के जीवन को नई दिशा देते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे सवारी गाड़ी बिना सिग्नल के स्टेशन पर नहीं आती, वैसे ही आत्मा भी अपने कर्मों के अनुसार ही गति प्राप्त करती है। उन्होंने कहा कि शरीर नश्वर है, लेकिन आत्मा अमर है और अंततः ईश्वर में ही विलीन हो जाती है।

कथा के दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति और शिक्षा पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने श्रोताओं से आम के पौधे लगाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रकृति के संरक्षण से ही जीवन संतुलित रह सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा कभी व्यर्थ नहीं जाती और भक्ति भी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।

कथावाचक ने भगवान राम और रावण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए जीवन में सेवा, मधुर वाणी, शीलता और संस्कारों के महत्व को अमृत के समान बताया। उन्होंने कहा कि “नाम में राम और कार्यों में सेवा ही सच्चा अमृत है।”

इस दौरान आयोजक रतन सिंह गोहिल, इन्दर सिंह गोहिल सहित परिवारजनों ने व्यास पीठ की पूजा-अर्चना कर कथावाचक का स्वागत किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से ग्रामीणजन एवं आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

वहीं कथा के प्रारंभ में बाल संत गोविन्द हाटकेश नागर ने भी अपने उद्बोधन में कहा कि भागवत कथा मनुष्य को दुर्गुणों से दूर रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि जैसे कोरोना काल में दूरी बनाकर सुरक्षा रखी गई, वैसे ही जीवन में बुराइयों से दूरी बनाना आवश्यक है।

पूरे आयोजन में युवा समिति एवं ग्रामीणों का सराहनीय योगदान रहा। कथा का समापन आगामी दिनों में भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के साथ होगा।

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“पीड़ा ही बनाती है माँ, वंश को तारता है भागीरथ”—पं कमलकिशोर नागर

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बदनावर। ग्राम पिंजराया में गोहिल परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। कथा के दौरान मालव माटी एवं मालवी वाणी के विख्यात कथावाचक पं. कमलकिशोर नागर ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरक उद्बोधन से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

पं. नागर ने कहा कि सत्संग और कथा मनुष्य के जीवन को नई दिशा देते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसे सवारी गाड़ी बिना सिग्नल के स्टेशन पर नहीं आती, वैसे ही आत्मा भी अपने कर्मों के अनुसार ही गति प्राप्त करती है। उन्होंने कहा कि शरीर नश्वर है, लेकिन आत्मा अमर है और अंततः ईश्वर में ही विलीन हो जाती है।

कथा के दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति और शिक्षा पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने श्रोताओं से आम के पौधे लगाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रकृति के संरक्षण से ही जीवन संतुलित रह सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा कभी व्यर्थ नहीं जाती और भक्ति भी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।

कथावाचक ने भगवान राम और रावण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए जीवन में सेवा, मधुर वाणी, शीलता और संस्कारों के महत्व को अमृत के समान बताया। उन्होंने कहा कि “नाम में राम और कार्यों में सेवा ही सच्चा अमृत है।”

इस दौरान आयोजक रतन सिंह गोहिल, इन्दर सिंह गोहिल सहित परिवारजनों ने व्यास पीठ की पूजा-अर्चना कर कथावाचक का स्वागत किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से ग्रामीणजन एवं आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

वहीं कथा के प्रारंभ में बाल संत गोविन्द हाटकेश नागर ने भी अपने उद्बोधन में कहा कि भागवत कथा मनुष्य को दुर्गुणों से दूर रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि जैसे कोरोना काल में दूरी बनाकर सुरक्षा रखी गई, वैसे ही जीवन में बुराइयों से दूरी बनाना आवश्यक है।

पूरे आयोजन में युवा समिति एवं ग्रामीणों का सराहनीय योगदान रहा। कथा का समापन आगामी दिनों में भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के साथ होगा।

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