Friday, April 17, 2026

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शाहपुरा में अंबेडकर जयंती ‘समरसता दिवस’ के रूप में मनाई, छात्रों को दिया समानता का संदेश

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक

शाहपुरा। श्री प्रताप सिंह बारहट राजकीय महाविद्यालय, शाहपुरा में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) की स्थानीय इकाई के तत्वावधान में आधुनिक भारत के निर्माता एवं भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती “समरसता दिवस” के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं डॉ. अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। समारोह की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य रामावतार मीणा ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन केवल व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों की स्थापना का प्रेरणादायक अध्याय है।

कार्यक्रम में मूलचंद खटीक ने अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. अंबेडकर के “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” के मूल मंत्र को आत्मसात करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यही संदेश समाज में समता और जागरूकता लाने का आधार है।

डॉ. ऋचा अंगिरा ने अपने संबोधन में समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं इकाई सचिव डॉ. रंजीत जगरिया ने डॉ. अंबेडकर के जीवन दर्शन और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ, स्थानीय इकाई के सदस्य तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रंजीत जगरिया ने किया, जबकि अंत में प्रियंका ढाका ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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शाहपुरा में अंबेडकर जयंती ‘समरसता दिवस’ के रूप में मनाई, छात्रों को दिया समानता का संदेश

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक

शाहपुरा। श्री प्रताप सिंह बारहट राजकीय महाविद्यालय, शाहपुरा में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) की स्थानीय इकाई के तत्वावधान में आधुनिक भारत के निर्माता एवं भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती “समरसता दिवस” के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं डॉ. अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। समारोह की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य रामावतार मीणा ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन केवल व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों की स्थापना का प्रेरणादायक अध्याय है।

कार्यक्रम में मूलचंद खटीक ने अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. अंबेडकर के “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” के मूल मंत्र को आत्मसात करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यही संदेश समाज में समता और जागरूकता लाने का आधार है।

डॉ. ऋचा अंगिरा ने अपने संबोधन में समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं इकाई सचिव डॉ. रंजीत जगरिया ने डॉ. अंबेडकर के जीवन दर्शन और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ, स्थानीय इकाई के सदस्य तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रंजीत जगरिया ने किया, जबकि अंत में प्रियंका ढाका ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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