ब्यूरो चीफ: बृजेश त्रिवेदी, सवाई माधोपुर
खण्डार। वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान के तहत किला क्षेत्र में रविवार को नृसिंह धार बालाजी किला टीम द्वारा जल एवं पर्यावरण संरक्षण को समर्पित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। “जल है तो कल है” के संदेश के साथ आयोजित कार्यक्रम में टीम के सदस्यों ने श्रमदान कर जल स्रोतों के संरक्षण, वृक्षारोपण और पशु-पक्षियों के लिए जल व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण कार्य संपन्न किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत गंगा पूजन के साथ किया गया। इसके बाद क्षेत्र को हरित एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर पौधारोपण किया गया। वहीं, भीषण गर्मी को देखते हुए मूक पशु-पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए पानी के परिंडे भी लगाए गए।
नृसिंह धार बालाजी टीम के सदस्य अंशु मथुरिया एवं अशोक सैन ने बताया कि प्रत्येक वर्ष वर्षा ऋतु प्रारंभ होने से पूर्व क्षेत्र के प्राचीन कुंडों की साफ-सफाई की जाती है। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष भी श्रमदान कर कुंडों में जमी मिट्टी एवं गंदगी को हटाया गया, जिससे आगामी मानसून में अधिक से अधिक वर्षा जल का संग्रहण किया जा सके।
उन्होंने बताया कि जल स्रोतों की समय पर सफाई और संरक्षण से न केवल वर्षा जल संचयन की क्षमता बढ़ती है, बल्कि गर्मी के मौसम में भी जल उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे क्षेत्र के भू-जल स्तर को संरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।
कार्यक्रम के दौरान टीम सदस्यों ने आमजन से जल संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि जल स्रोतों का संरक्षण भविष्य की आवश्यकता है और सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरण संतुलन को बनाए रखा जा सकता है।
इस अवसर पर हरिशंकर जांगिड़, लक्ष्मीकांत शर्मा, कमलेश पाठक, भरत जाट, गिर्राज वैष्णव, रामवतार, जितेंद्र गौतम, झूले शर्मा, रामहरि प्रजापत एवं ओमप्रकाश प्रजापत सहित बड़ी संख्या में टीम सदस्य एवं पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने भविष्य में भी जल एवं पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि जल स्रोतों और प्रकृति की सुरक्षा के लिए समाज एकजुट होकर कार्य करे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।




