Wednesday, June 3, 2026

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छिंदवाड़ा में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, टाइगर के अवशेषों के साथ तस्कर गिरफ्तार

ब्यूरो रिपोर्ट: रहमान शाह मरावी, छिंदवाड़ा

छिंदी/तामिया। वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनके अंगों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में वन विभाग की टीम ने एक संदिग्ध तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से टाइगर के दांत, नाखून तथा अन्य वन्य प्राणियों की हड्डियों के अवशेष बरामद किए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी ने इन अवशेषों को अपने घर में पंखे के ऊपर छिपाकर रखा था।

वन मंडलाधिकारी छिंदी के निर्देशन में वन विभाग की टीम को पिछले कुछ समय से क्षेत्र में वन्यजीवों के अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त की सूचनाएं मिल रही थीं। मुखबिर से मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर विभाग ने मंगलवार सुबह करीब 6 बजे आरोपी के घर पर घेराबंदी कर छापेमारी की। तलाशी के दौरान टीम को टाइगर के दो दांत, एक नाखून तथा वन्य प्राणियों की हड्डियों के कई टुकड़े बरामद हुए।

वन मंडलाधिकारी गया प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि बरामद सामग्री को जब्त कर लिया गया है तथा मामले की जांच जारी है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी की पहचान छिंदी निवासी दिनेश कुमार नेमा (45 वर्ष) के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि दिनेश कुमार नेमा वर्ष 2019 में दर्ज एक वन्यजीव तस्करी और बाघ शिकार से जुड़े मामले में भी जेल जा चुका है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि बरामद अवशेष पुराने हैं और कथित रूप से उसी समय के हैं। हालांकि वन विभाग इस दावे की सत्यता की जांच कर रहा है।

वन अधिकारियों के अनुसार जब्त अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में कीमत लाखों रुपये हो सकती है। विभाग इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि इन अवशेषों का उपयोग तांत्रिक गतिविधियों या अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क में किया जाना था या नहीं।

अधिकारियों ने बताया कि जब्त अवशेषों को फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा जाएगा, जिससे उनकी प्रजाति और उम्र की पुष्टि हो सके। वहीं आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है और इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।

वन विभाग का मानना है कि पूछताछ के दौरान वन्यजीव शिकार और तस्करी से जुड़े अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि इन वन्य प्राणियों का शिकार कब, कहां और किन परिस्थितियों में किया गया था।

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छिंदवाड़ा में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, टाइगर के अवशेषों के साथ तस्कर गिरफ्तार

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छिंदी/तामिया। वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनके अंगों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में वन विभाग की टीम ने एक संदिग्ध तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से टाइगर के दांत, नाखून तथा अन्य वन्य प्राणियों की हड्डियों के अवशेष बरामद किए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी ने इन अवशेषों को अपने घर में पंखे के ऊपर छिपाकर रखा था।

वन मंडलाधिकारी छिंदी के निर्देशन में वन विभाग की टीम को पिछले कुछ समय से क्षेत्र में वन्यजीवों के अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त की सूचनाएं मिल रही थीं। मुखबिर से मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर विभाग ने मंगलवार सुबह करीब 6 बजे आरोपी के घर पर घेराबंदी कर छापेमारी की। तलाशी के दौरान टीम को टाइगर के दो दांत, एक नाखून तथा वन्य प्राणियों की हड्डियों के कई टुकड़े बरामद हुए।

वन मंडलाधिकारी गया प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि बरामद सामग्री को जब्त कर लिया गया है तथा मामले की जांच जारी है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी की पहचान छिंदी निवासी दिनेश कुमार नेमा (45 वर्ष) के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि दिनेश कुमार नेमा वर्ष 2019 में दर्ज एक वन्यजीव तस्करी और बाघ शिकार से जुड़े मामले में भी जेल जा चुका है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि बरामद अवशेष पुराने हैं और कथित रूप से उसी समय के हैं। हालांकि वन विभाग इस दावे की सत्यता की जांच कर रहा है।

वन अधिकारियों के अनुसार जब्त अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में कीमत लाखों रुपये हो सकती है। विभाग इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि इन अवशेषों का उपयोग तांत्रिक गतिविधियों या अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क में किया जाना था या नहीं।

अधिकारियों ने बताया कि जब्त अवशेषों को फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा जाएगा, जिससे उनकी प्रजाति और उम्र की पुष्टि हो सके। वहीं आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है और इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।

वन विभाग का मानना है कि पूछताछ के दौरान वन्यजीव शिकार और तस्करी से जुड़े अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि इन वन्य प्राणियों का शिकार कब, कहां और किन परिस्थितियों में किया गया था।

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