ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक
शाहपुरा (भीलवाड़ा)। शाहपुरा स्थित वाल्मीकि पंचायत भवन में आयोजित सामाजिक सभा में वाल्मीकि समाज के दो पक्षों के बीच पिछले 27 वर्षों से चला आ रहा मनमुटाव समाप्त हो गया। समाज की सहमति और वरिष्ठजनों के प्रयासों से दोनों पक्ष एक मंच पर आए और सामाजिक एकता एवं समरसता का परिचय देते हुए आपसी मतभेद भुलाकर पुनः एकजुट हो गए।
सभा के दौरान सुरेश चंद्र घूसर ने अपने बड़े भाई शांतिलाल की ओर से समाज के समक्ष भावनाएं व्यक्त कीं। समाज के वरिष्ठजनों और उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए शांतिलाल का पुनः समाज में स्वागत किया। इस अवसर पर समाजजनों ने रंग-गुलाल लगाकर, पुष्पमालाएं पहनाकर तथा गले मिलकर एक-दूसरे का अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में कोठिया सरपंच ओमप्रकाश घूसर का भी सम्मान किया गया। समाज के लोगों ने कहा कि दोनों परिवार समाज के अभिन्न अंग रहे हैं और आगे भी सामाजिक गतिविधियों में मिलकर भागीदारी निभाएंगे। सभा में बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजन, युवा एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर भंवरलाल भारती, घेवरचंद, तेजमल लोट, घनश्याम लाल, रतनलाल, जगदीश चंद्र, गणपत लाल, रंजीत, अनिल मास्टर, मानिकचंद, शांति प्रकाश, गुलाबचंद, राजेश, उदयलाल, नारायण, सुरेंद्र, पुष्पेंद्र, रमेश चंद्र, मास्टर फूलचंद, परमेश्वर लाल, गोपाल लाल पथरोड, ताराचंद, विनोद, संजय लाल, कालूलाल जमादार, अमित, शंभूलाल, विजेंद्र, मनोज, अशोक, अक्षय, घीसूलाल, सीताराम, गंगासागर, राजेंद्र आजाद, मनदीप, अविनाश, साहिल सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।
वाल्मीकि समाज के अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद गोपाल लाल ने कहा कि 27 वर्षों से समाज में बनी दूरियों को समाप्त कर दोनों पक्षों को एक करने का यह निर्णय ऐतिहासिक है। इससे समाज में भाईचारा, सामाजिक समरसता और एकता को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं के लिए भी सकारात्मक संदेश लेकर आई है।
सभा के अंत में सुरेश चंद्र घूसर ने समाज के सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आपसी सहमति और सौहार्द से लिया गया यह निर्णय शाहपुरा के सामाजिक इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा। उन्होंने समाज के सभी वरिष्ठजनों और सदस्यों का सहयोग एवं समर्थन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।




