Wednesday, June 3, 2026

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जगदीशपुर को इंडस्ट्रियल सिटी बनाने का सपना अधूरा, बंद फैक्ट्री के साथ किसान और मजदूर आज भी परेशान

ब्यूरो रिपोर्ट: सज्जन खान, जाफरगंज (उत्तर प्रदेश)

अमेठी। कभी औद्योगिक विकास और रोजगार का प्रतीक बनने का सपना देखने वाला जगदीशपुर स्टील प्लांट आज भी अपने पुनर्जीवन की प्रतीक्षा कर रहा है। क्षेत्र के किसानों, पूर्व कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि दशकों से राजनीतिक घोषणाएं तो हुईं, लेकिन प्लांट को पुनः चालू करने की दिशा में ठोस परिणाम नहीं निकल सके।

बताया जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने जगदीशपुर को औद्योगिक नगर के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की थी। इसी क्रम में उषा ग्रुप के उद्योगपति अनिल राय और विनय राय ने वर्ष 1989 में एशिया के सबसे बड़े स्टील प्लांटों में से एक की नींव रखी। परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (UPSIDC) से 99 वर्ष की लीज पर लगभग 740 एकड़ भूमि प्राप्त की गई।

प्लांट स्थापना के लिए कमरौली, कठौरा, कोयलारा, पलिया पश्चिम और मुबारकपुर गांवों के किसानों ने मुआवजे और परिवार के सदस्यों को स्थायी रोजगार मिलने की उम्मीद में अपनी जमीन दी। लगभग 9,447 करोड़ रुपये के निवेश वाली इस परियोजना का संचालन वर्ष 2000 में शुरू हुआ। उस समय करीब 600 लोगों को स्थायी तथा लगभग 2,000 लोगों को अस्थायी रोजगार मिला था।

हालांकि शुरुआत के कुछ वर्षों बाद ही परिस्थितियां बदल गईं और वर्ष 2002 में प्लांट को बीमार उद्योग घोषित कर बंद कर दिया गया। इसके बाद क्षेत्र के लोगों की उम्मीदें बार-बार राजनीतिक घोषणाओं से जुड़ती रहीं।

27 फरवरी 2009 को तत्कालीन सांसद राहुल गांधी ने घोषणा की थी कि बंद पड़े मालविका स्टील प्लांट के संचालन की जिम्मेदारी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) को सौंपी जाएगी तथा लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से इसे पुनः शुरू किया जाएगा। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्लांट को चालू करने के बजाय SAIL ने वहां अपनी सरिया इकाई और गोदाम स्थापित कर दिया। वर्ष 2014 तक केंद्र में यूपीए सरकार रही, लेकिन प्लांट के पुनरुद्धार को लेकर कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी।

इसके बाद वर्ष 2019 में केंद्रीय मंत्री और अमेठी सांसद स्मृति ईरानी ने भी प्लांट को जल्द शुरू कराने की बात कही। प्रधानमंत्री द्वारा ऑनलाइन लोकार्पण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार इसके बाद भी प्लांट की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। उनका कहना है कि जहां कभी हजारों कर्मचारी कार्यरत थे, वहीं आज वहां केवल 20 से 25 लोग ही काम कर रहे हैं।

वर्ष 2020 में SAIL द्वारा प्लांट की पुरानी मशीनों और स्क्रैप सामग्री को लगभग 61 करोड़ रुपये में नीलाम कर दिया गया। इस कदम के बाद क्षेत्र में प्लांट के भविष्य को लेकर और अधिक निराशा फैल गई।

वर्तमान में अमेठी का प्रतिनिधित्व सांसद केएल शर्मा कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय किसानों और पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि फैक्ट्री के पुनरुद्धार और रोजगार के मुद्दे अब भी अधूरे हैं। जिन किसानों ने औद्योगिक विकास और रोजगार के सपनों के साथ अपनी जमीनें दी थीं, वे आज भी स्थायी समाधान और अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

क्षेत्र के लोगों का मानना है कि यदि जगदीशपुर स्टील प्लांट को पुनर्जीवित किया जाए तो इससे न केवल हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि अमेठी और आसपास के क्षेत्र के औद्योगिक विकास को भी नई गति मिल सकती है।

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जगदीशपुर को इंडस्ट्रियल सिटी बनाने का सपना अधूरा, बंद फैक्ट्री के साथ किसान और मजदूर आज भी परेशान

ब्यूरो रिपोर्ट: सज्जन खान, जाफरगंज (उत्तर प्रदेश)

अमेठी। कभी औद्योगिक विकास और रोजगार का प्रतीक बनने का सपना देखने वाला जगदीशपुर स्टील प्लांट आज भी अपने पुनर्जीवन की प्रतीक्षा कर रहा है। क्षेत्र के किसानों, पूर्व कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि दशकों से राजनीतिक घोषणाएं तो हुईं, लेकिन प्लांट को पुनः चालू करने की दिशा में ठोस परिणाम नहीं निकल सके।

बताया जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने जगदीशपुर को औद्योगिक नगर के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की थी। इसी क्रम में उषा ग्रुप के उद्योगपति अनिल राय और विनय राय ने वर्ष 1989 में एशिया के सबसे बड़े स्टील प्लांटों में से एक की नींव रखी। परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (UPSIDC) से 99 वर्ष की लीज पर लगभग 740 एकड़ भूमि प्राप्त की गई।

प्लांट स्थापना के लिए कमरौली, कठौरा, कोयलारा, पलिया पश्चिम और मुबारकपुर गांवों के किसानों ने मुआवजे और परिवार के सदस्यों को स्थायी रोजगार मिलने की उम्मीद में अपनी जमीन दी। लगभग 9,447 करोड़ रुपये के निवेश वाली इस परियोजना का संचालन वर्ष 2000 में शुरू हुआ। उस समय करीब 600 लोगों को स्थायी तथा लगभग 2,000 लोगों को अस्थायी रोजगार मिला था।

हालांकि शुरुआत के कुछ वर्षों बाद ही परिस्थितियां बदल गईं और वर्ष 2002 में प्लांट को बीमार उद्योग घोषित कर बंद कर दिया गया। इसके बाद क्षेत्र के लोगों की उम्मीदें बार-बार राजनीतिक घोषणाओं से जुड़ती रहीं।

27 फरवरी 2009 को तत्कालीन सांसद राहुल गांधी ने घोषणा की थी कि बंद पड़े मालविका स्टील प्लांट के संचालन की जिम्मेदारी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) को सौंपी जाएगी तथा लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से इसे पुनः शुरू किया जाएगा। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्लांट को चालू करने के बजाय SAIL ने वहां अपनी सरिया इकाई और गोदाम स्थापित कर दिया। वर्ष 2014 तक केंद्र में यूपीए सरकार रही, लेकिन प्लांट के पुनरुद्धार को लेकर कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी।

इसके बाद वर्ष 2019 में केंद्रीय मंत्री और अमेठी सांसद स्मृति ईरानी ने भी प्लांट को जल्द शुरू कराने की बात कही। प्रधानमंत्री द्वारा ऑनलाइन लोकार्पण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार इसके बाद भी प्लांट की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। उनका कहना है कि जहां कभी हजारों कर्मचारी कार्यरत थे, वहीं आज वहां केवल 20 से 25 लोग ही काम कर रहे हैं।

वर्ष 2020 में SAIL द्वारा प्लांट की पुरानी मशीनों और स्क्रैप सामग्री को लगभग 61 करोड़ रुपये में नीलाम कर दिया गया। इस कदम के बाद क्षेत्र में प्लांट के भविष्य को लेकर और अधिक निराशा फैल गई।

वर्तमान में अमेठी का प्रतिनिधित्व सांसद केएल शर्मा कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय किसानों और पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि फैक्ट्री के पुनरुद्धार और रोजगार के मुद्दे अब भी अधूरे हैं। जिन किसानों ने औद्योगिक विकास और रोजगार के सपनों के साथ अपनी जमीनें दी थीं, वे आज भी स्थायी समाधान और अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

क्षेत्र के लोगों का मानना है कि यदि जगदीशपुर स्टील प्लांट को पुनर्जीवित किया जाए तो इससे न केवल हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि अमेठी और आसपास के क्षेत्र के औद्योगिक विकास को भी नई गति मिल सकती है।

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