Sunday, March 22, 2026

National

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नन्हीं श्रेया की बड़ी पहल! ‘गौरैया बचाओ’ अभियान से जागी नई उम्मीद

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक, शाहपुरा

विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर शाहपुरा में एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली, जहां बाल पर्यावरण योद्धा “ग्रीन लिटिल बेबी” के नाम से प्रसिद्ध श्रेया कुमावत ने मासूम बच्चों के साथ मिलकर गौरैया संरक्षण के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने उत्साहपूर्वक अपने हाथों से पक्षीघर (बर्ड हाउस), पानी के लिए परिंडे और दाने के लिए फीडर तैयार किए। इन फीडर को प्लास्टिक की बोतलों के पुनः उपयोग (रिसाइक्लिंग) से बनाया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण का दोहरा संदेश दिया गया—एक ओर गौरैया के लिए सुरक्षित आश्रय और दूसरी ओर प्लास्टिक कचरे में कमी।

इस अवसर पर श्रेया कुमावत ने बताया कि गौरैया, जो कभी हर घर-आंगन की पहचान हुआ करती थी, आज विलुप्ति की कगार पर पहुंच रही है। इसके पीछे पेड़ों की कटाई, बढ़ता शहरीकरण, मोबाइल टावरों का रेडिएशन और प्रदूषण प्रमुख कारण हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि छोटे-छोटे प्रयासों के जरिए हम इस नन्हीं चिड़िया को फिर से अपने जीवन का हिस्सा बना सकते हैं।

कार्यक्रम में भरतपुर की संस्था सर्वे भवन्तु सुखिनः जियो और जीने दो का विशेष सहयोग रहा। संस्था की संस्थापक कविता सिंह ने हर वर्ष नि:शुल्क गौरैया घर उपलब्ध कराकर इस अभियान को मजबूती प्रदान करने की बात कही और श्रेया कुमावत के प्रयासों को सराहनीय बताया।

कार्यक्रम के अंत में बच्चों को पक्षीघर एवं फीडर वितरित किए गए तथा सभी से अपील की गई कि वे गर्मियों में पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था अवश्य करें।
कार्यक्रम का समापन एक प्रेरणादायक संकल्प के साथ हुआ—“जब हर घर बनेगा गौरैया का घर, तब फिर से गूंजेगी चहचहाहट हर डगर।”

International

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नन्हीं श्रेया की बड़ी पहल! ‘गौरैया बचाओ’ अभियान से जागी नई उम्मीद

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक, शाहपुरा

विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर शाहपुरा में एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली, जहां बाल पर्यावरण योद्धा “ग्रीन लिटिल बेबी” के नाम से प्रसिद्ध श्रेया कुमावत ने मासूम बच्चों के साथ मिलकर गौरैया संरक्षण के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने उत्साहपूर्वक अपने हाथों से पक्षीघर (बर्ड हाउस), पानी के लिए परिंडे और दाने के लिए फीडर तैयार किए। इन फीडर को प्लास्टिक की बोतलों के पुनः उपयोग (रिसाइक्लिंग) से बनाया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण का दोहरा संदेश दिया गया—एक ओर गौरैया के लिए सुरक्षित आश्रय और दूसरी ओर प्लास्टिक कचरे में कमी।

इस अवसर पर श्रेया कुमावत ने बताया कि गौरैया, जो कभी हर घर-आंगन की पहचान हुआ करती थी, आज विलुप्ति की कगार पर पहुंच रही है। इसके पीछे पेड़ों की कटाई, बढ़ता शहरीकरण, मोबाइल टावरों का रेडिएशन और प्रदूषण प्रमुख कारण हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि छोटे-छोटे प्रयासों के जरिए हम इस नन्हीं चिड़िया को फिर से अपने जीवन का हिस्सा बना सकते हैं।

कार्यक्रम में भरतपुर की संस्था सर्वे भवन्तु सुखिनः जियो और जीने दो का विशेष सहयोग रहा। संस्था की संस्थापक कविता सिंह ने हर वर्ष नि:शुल्क गौरैया घर उपलब्ध कराकर इस अभियान को मजबूती प्रदान करने की बात कही और श्रेया कुमावत के प्रयासों को सराहनीय बताया।

कार्यक्रम के अंत में बच्चों को पक्षीघर एवं फीडर वितरित किए गए तथा सभी से अपील की गई कि वे गर्मियों में पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था अवश्य करें।
कार्यक्रम का समापन एक प्रेरणादायक संकल्प के साथ हुआ—“जब हर घर बनेगा गौरैया का घर, तब फिर से गूंजेगी चहचहाहट हर डगर।”

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