Thursday, June 4, 2026

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ईरान-अमेरिका के बीच फिर बढ़ा सैन्य तनाव, युद्धविराम समझौते पर संकट के बादल

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक, शाहपुरा

तेहरान/वॉशिंगटन | हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। दोनों देशों के बीच हालिया घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा और युद्धविराम समझौते के भविष्य को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि केश्म द्वीप पर हुए अमेरिकी हमले के जवाब में उसने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय, सैन्य एयरबेस तथा हेलीकॉप्टर ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन के जरिए हमला किया गया।

वहीं अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुवैत और बहरीन की ओर दागी गई ईरानी मिसाइलों एवं ड्रोन हमलों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया गया। सेंटकॉम के अनुसार, कुवैत की ओर दागी गई दो मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही निष्क्रिय हो गईं, जबकि बहरीन को निशाना बनाने वाली तीन मिसाइलों को अमेरिकी एवं बहरीन के रक्षा तंत्र ने रोक लिया।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में तैनात सैन्य बलों को निशाना बनाने के उद्देश्य से छोड़े गए कई ड्रोन भी बिना किसी नुकसान के मार गिराए गए। दूसरी ओर, अमेरिका ने भी केश्म द्वीप पर स्थित कुछ सैन्य प्रतिष्ठानों और एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर हवाई कार्रवाई किए जाने की पुष्टि की है।

सेंटकॉम ने यह भी दावा किया कि क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजर रहे नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान की ओर से भेजे गए तीन एकतरफा हमलावर ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया।

दोनों पक्षों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों और जवाबी कार्रवाइयों ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नियंत्रित नहीं हुई तो दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

अमेरिकी पक्ष के अनुसार, ताजा विवाद उस समय शुरू हुआ जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक टैंकर को रोकने की कार्रवाई की गई, जिसके बाद घटनाक्रम तेजी से सैन्य टकराव में बदलता चला गया।

क्षेत्र में जारी इस तनावपूर्ण स्थिति पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हुई हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है।

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ईरान-अमेरिका के बीच फिर बढ़ा सैन्य तनाव, युद्धविराम समझौते पर संकट के बादल

ब्यूरो रिपोर्ट: राजेन्द्र खटीक, शाहपुरा

तेहरान/वॉशिंगटन | हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। दोनों देशों के बीच हालिया घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा और युद्धविराम समझौते के भविष्य को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि केश्म द्वीप पर हुए अमेरिकी हमले के जवाब में उसने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय, सैन्य एयरबेस तथा हेलीकॉप्टर ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन के जरिए हमला किया गया।

वहीं अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुवैत और बहरीन की ओर दागी गई ईरानी मिसाइलों एवं ड्रोन हमलों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया गया। सेंटकॉम के अनुसार, कुवैत की ओर दागी गई दो मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही निष्क्रिय हो गईं, जबकि बहरीन को निशाना बनाने वाली तीन मिसाइलों को अमेरिकी एवं बहरीन के रक्षा तंत्र ने रोक लिया।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में तैनात सैन्य बलों को निशाना बनाने के उद्देश्य से छोड़े गए कई ड्रोन भी बिना किसी नुकसान के मार गिराए गए। दूसरी ओर, अमेरिका ने भी केश्म द्वीप पर स्थित कुछ सैन्य प्रतिष्ठानों और एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर हवाई कार्रवाई किए जाने की पुष्टि की है।

सेंटकॉम ने यह भी दावा किया कि क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजर रहे नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान की ओर से भेजे गए तीन एकतरफा हमलावर ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया।

दोनों पक्षों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों और जवाबी कार्रवाइयों ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नियंत्रित नहीं हुई तो दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

अमेरिकी पक्ष के अनुसार, ताजा विवाद उस समय शुरू हुआ जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक टैंकर को रोकने की कार्रवाई की गई, जिसके बाद घटनाक्रम तेजी से सैन्य टकराव में बदलता चला गया।

क्षेत्र में जारी इस तनावपूर्ण स्थिति पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हुई हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है।

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