Wednesday, June 3, 2026

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जायस थाना फिर विवादों में, रिश्वतखोरी के नए आरोप, थाना अध्यक्ष पर भी रिश्वत लेने के आरोप

ब्यूरो रिपोर्ट: शहरीयार अहमद

अमेठी। जिले के जायस थाना क्षेत्र में पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में एंटी करप्शन टीम द्वारा जायस थाने के एक सिपाही को 9 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किए जाने के बाद अब थाना अध्यक्ष और चौकी स्तर के पुलिसकर्मियों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक ठेकेदार ने आरोप लगाया है कि हरे एवं फलदार वृक्षों की कटान की अनुमति दिलाने के नाम पर बहादुरपुर चौकी में तैनात एक पुलिसकर्मी जंगबहादुर ने उससे 4,500 रुपये लिए। ठेकेदार का दावा है कि यह राशि थाना अध्यक्ष को देने के लिए मांगी गई थी। इसके अलावा, उसने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले चौकी प्रभारी के नाम पर उससे 3,000 रुपये और लिए जा चुके हैं।

ठेकेदार का कहना है कि जब उसने प्रतिबंधित वृक्षों की कटान की सूचना पुलिस को दी तो थाना अध्यक्ष ने यह कहते हुए मामला टाल दिया कि इसकी सूचना वन विभाग को दी जाए, क्योंकि पुलिस इस मामले में मुकदमा दर्ज नहीं कर सकती।

क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। उनका कहना है कि रात के समय होने वाले अवैध खनन को लेकर भी संरक्षण और वसूली की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।

हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही पुलिस विभाग की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी किया गया है। लेकिन लगातार सामने आ रहे आरोपों ने क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब लोगों की निगाहें उच्च अधिकारियों की कार्रवाई और संभावित विभागीय जांच पर टिकी हैं। आमजन यह जानना चाहते हैं कि आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या फिर प्रतिबंधित वृक्षों की कटान और अन्य कथित गैरकानूनी गतिविधियां इसी तरह जारी रहेंगी।

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जायस थाना फिर विवादों में, रिश्वतखोरी के नए आरोप, थाना अध्यक्ष पर भी रिश्वत लेने के आरोप

ब्यूरो रिपोर्ट: शहरीयार अहमद

अमेठी। जिले के जायस थाना क्षेत्र में पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में एंटी करप्शन टीम द्वारा जायस थाने के एक सिपाही को 9 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किए जाने के बाद अब थाना अध्यक्ष और चौकी स्तर के पुलिसकर्मियों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक ठेकेदार ने आरोप लगाया है कि हरे एवं फलदार वृक्षों की कटान की अनुमति दिलाने के नाम पर बहादुरपुर चौकी में तैनात एक पुलिसकर्मी जंगबहादुर ने उससे 4,500 रुपये लिए। ठेकेदार का दावा है कि यह राशि थाना अध्यक्ष को देने के लिए मांगी गई थी। इसके अलावा, उसने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले चौकी प्रभारी के नाम पर उससे 3,000 रुपये और लिए जा चुके हैं।

ठेकेदार का कहना है कि जब उसने प्रतिबंधित वृक्षों की कटान की सूचना पुलिस को दी तो थाना अध्यक्ष ने यह कहते हुए मामला टाल दिया कि इसकी सूचना वन विभाग को दी जाए, क्योंकि पुलिस इस मामले में मुकदमा दर्ज नहीं कर सकती।

क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। उनका कहना है कि रात के समय होने वाले अवैध खनन को लेकर भी संरक्षण और वसूली की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।

हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही पुलिस विभाग की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी किया गया है। लेकिन लगातार सामने आ रहे आरोपों ने क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब लोगों की निगाहें उच्च अधिकारियों की कार्रवाई और संभावित विभागीय जांच पर टिकी हैं। आमजन यह जानना चाहते हैं कि आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या फिर प्रतिबंधित वृक्षों की कटान और अन्य कथित गैरकानूनी गतिविधियां इसी तरह जारी रहेंगी।

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